बाह्य क्षेत्र : FDI को व्यवस्थित रूप देना
• वैश्विक अनिश्चितताओं और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भारत का बाहरी क्षेत्र सुदृढ़ बना हुआ है।
भारत के व्यापार प्रदर्शन में रुझान
• भारत के कुल निर्यात (माल व सेवाएँ) ने वित्त वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों में सकारात्मक गति दिखाई है, जो 602.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें साल-दर-साल 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। (अप्रैल-दिसंबर 2024)
• अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान कुल आयात 682.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें साल-दर-साल 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
• इसी अवधि के दौरान कुल आयात स्थिर घरेलू माँग के कारण 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 682.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
• निर्यात की तुलना में समग्र आयात में अधिक उल्लेखनीय वृद्धि के कारण अप्रैल-दिसंबर, 2023 के दौरान समग्र व्यापार घाटा 69.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में 79.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
• अप्रैल-नवंबर 2024 के दौरान भारत का विभिन्न देशों से आयात व्यापार निम्नलिखित हैं-
मिलियन अमेरिकी डॉलर
S.N | देश/क्षेत्र | 2023-2024
| 2024-25 (April- Nov.)
| 2024-25 (April-Nov.) |
1. | चीन | 1,01,736 | 74,415 | 15.8 |
2. | रूस | 61,159 | 43,906 | 9.3 |
3. | संयुक्त अरब अमीरात | 48,026 | 40,144 | 8.5 |
4. | संयुक्त राज्य अमेरिका | 42,195 | 29,630 | 6.3 |
5. | सऊदी अरब | 31,416 | 19,619 | 4.2 |
6. | इराक | 29,961 | 19,054 | 4.0 |
7. | इंडोनेशिया | 23,411 | 16,199 | 3.4 |
8. | स्विट्ज़रलैंड | 21,248 | 15,452 | 3.3 |
9. | कोरिया गणराज्य | 21,135 | 14,259 | 3.0 |
10. | सिंगापुर | 21,199 | 13,912 | 2.9 |
• अप्रैल-नवंबर 2024 के दौरान भारत का विभिन्न देशों में निर्यात व्यापार निम्नलिखित हैं-
मिलियन अमेरिकी डॉलर
S.N | देश / क्षेत्र | 2023-2024 | 2024-25 (April- Nov.) | 2024-25 (April-Nov.) % Share |
1. | संयुक्त राज्य अमेरिका | 77,523 | 52,905 | 18.65 |
2. | संयुक्त अरब अमीरात | 35,625 | 23,880 | 8.42 |
3. | नीदरलैंड | 22,369 | 16,306 | 5.75 |
4. | यूनाइटेड किंगडम | 12,982 | 9,602 | 3.38 |
5. | सिंगापुर | 14,414 | 9,404 | 3.31 |
6. | चीन | 16,667 | 9,211 | 3.25 |
7. | सऊदी अरब | 11,599 | 7,314 | 2.58 |
8. | बांग्लादेश | 11,066 | 7,083 | 2.50 |
9. | जर्मनी | 9,842 | 6,828 | 2.41 |
10. | ऑस्ट्रेलिया | 7,941 | 5,512 | 1.94 |
व्यापारिक वस्तुएँ
• कुल मिलाकर, व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात में 1.6 प्रतिशत (वर्ष दर वर्ष आधार) की वृद्धि दर्ज की गई है जिसका मुख्य कारण अंतर्राष्ट्रीय वस्तु कीमतों में गिरावट के कारण पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात मूल्य में कमी रही।
• निर्यात की तुलना में माल के आयात में वृद्धि की तेज गति ने अप्रैल-दिसंबर 2024 में व्यापारिक वस्तु व्यापार घाटे को 210.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने में योगदान दिया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 189.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान व्यापार
|
| दिसंबर 2024 (बिलियन अमेरिकी डॉलर) | दिसंबर 2023 (बिलियन अमेरिकी डॉलर) |
व्यापार | निर्यात | 321.71 | 316.65 |
आयात | 532.48 | 506.39 | |
सेवाएँ | निर्यात | 280.94 | 251.71 |
आयात | 149.67 | 131.64 | |
कुल व्यापार (माल+सेवाएं)* | निर्यात | 602.64 | 568.36 |
आयात | 682.15 | 638.03 | |
व्यापार संतुलन | -79.50 | -69.67 | |
* नोट:: | |||
कपड़ा निर्यात
• भारत वैश्विक स्तर पर कपड़ा और परिधान का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है।
• कपड़ा और परिधान उद्योग सकल घरेलू उत्पाद में 2.3 प्रतिशत, औद्योगिक उत्पादन में 13 प्रतिशत और निर्यात में 12 प्रतिशत का योगदान देता है।
• यह कृषि के बाद सबसे बड़े रोजगार सृजनकर्ताओं में से एक है, जिसमें 45 मिलियन से अधिक लोग सीधे रोजगार पाते हैं, जिनमें कई महिलाएँ और ग्रामीण आबादी शामिल हैं।"
• इस उद्योग की समावेशी प्रकृति के एक और सबूत के रूप में, इसकी लगभग 80 प्रतिशत क्षमता देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम एमएसएमई समूहों (क्लस्टरों) में फैली हुई है।"
• आम तौर पर, भारतीय कपड़ा निर्यात बास्केट का रुझान कपास और कपास आधारित उत्पादों की ओर रहा है।
• भारत की प्रमुख कपड़ा निर्यात श्रेणी, यानी परिधान के संबंध में, देश की बाजार हिस्सेदारी 2023 में वैश्विक स्तर पर 2.8 प्रतिशत रही। हालाँकि, यह उद्योग के प्रमुख खिलाड़ियों, जैसे चीन (30 प्रतिशत), बांग्लादेश (9 प्रतिशत) और वियतनाम (7 प्रतिशत) की तुलना में बहुत कम है।
• केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करते हुए वर्ष 2030 तक 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ 350 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कपड़ा बाजार का लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयारी रहने को कहा।
वैश्विक चुनौतियों के बीच सेवा व्यापार लचीला रहा।
• सेवा क्षेत्र के निर्यात ने लचीलापन का प्रदर्शन किया है, जबकि माल के निर्यात में हाल के महीनों में संयम देखा गया है। प्रतिकूल भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच वित्त वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों में वे 11.6 प्रतिशत की दर से बढ़े।
• सेवाओं के निर्यात में वृद्धि ने वित्त वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों में वित्त वर्ष 2014 के पहले नौ महीनों में 120.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से लेकर 131.3 बिलियन डॉलर की राशि में वृद्धि में योगदान दिया।
• वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी दुगुनी से भी अधिक हो गई है, जो 2005 में 1.9 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में लगभग 4.3 प्रतिशत हो गई है।
• दूरसंचार, कम्प्यूटर और सूचना सेवा क्षेत्र के वैश्विक निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी 10.2 फीसदी है, अंकटाड के अनुसार इस क्षेत्र में भारत का स्थान पूरी दुनिया में दूसरा है ।
• 'अन्य व्यावसायिक सेवा क्षेत्र' भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसमें विश्व में भारत की हिस्सेदारी 7.2 प्रतिशत है (दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है), जो वृत्तिक और परामर्शी सेवाओं में अपनी विशेषज्ञता से प्रेरित है।
ई-कॉमर्स निर्यात
• वर्तमान बाजार के आकार से, भारत का ई-कॉमर्स बाजार एक छोटा-सा अंश बनाता है, जो वैश्विक बाजार का लगभग 1.5 प्रतिशत है, और यह आने वाले वर्षों में लगभग 2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
• इन निर्यातों ने वित्त वर्ष 23 के दौरान अनुमानित 4 से 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का उत्पादन किया और वर्ष 2030 तक यूएसडी 200 से बढ़कर 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है।
भुगतान संतुलन- चुनौतियों के बीच सुदृढ़
• वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.2 फीसदी रहा, जिसे नेट सेवा प्राप्तियों की वृद्धि तथा निजी अंतरण प्राप्तियों में वृद्धि से समर्थन मिला है।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश
• वित्त वर्ष 2025 में सकल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में मजबूती आई है, जो वित्त वर्ष 2024 के पहले 8 महीनों के 47.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 की सामान अवधि के लिए 55.6 बिलियन डॉलर हो गया है, इसमें 17.9 फीसदी की वर्ष दर वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है।
पोर्टफोलियो प्रवाह निष्पादन
• संचयी आधार पर, भारत में निवल एफपीआई अंतर्वाह (इक्विटी और ऋण अंतर्वाह का योग) अप्रैल से दिसंबर 2024 के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान 31.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से घटकर 10.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
• पोर्टफोलियो प्रवाह में अस्थिरता वैश्विक विकास के लिए इक्विटी और बॉण्ड बाजारों की संवेदनशीलता को रेखांकित करती है। हालाँकि, भारत में मजबूत आर्थिक और कॉर्पोरेट बुनियादी बातें विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय इक्विटी बाजार के दीर्घकालिक आकर्षण को मजबूत करती है।
विदेशी मुद्रा प्रारक्षित निधि
• 700 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेंचमार्क को पार करने के बाद, भारत का विदेशी मुद्रा प्रारक्षित निधि दिसंबर 2024 के अंत तक 640.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक कम हो गया है।
• यह भंडार सितंबर 2024 तक भारत के 711.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर के विदेशी ऋण के लगभग 90 प्रतिशत को कवर करने व 10 महीने से अधिक का आयात कवर प्रदान करने के लिए पर्याप्त था, जो बाह्य जोखिम के लिए एक मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
• विदेशी मुद्रा भंडार 3 जनवरी 2025 तक की स्थिति के अनुसार 634.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
• वर्ष 2024 तक, भारत ने दुनिया के सबसे बड़े विदेशी मुद्रा प्रारक्षित निधि रखने वाले देशों में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया है, जो चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है।
विनिमय दर
• वित्त वर्ष 2024-25 के पहले नौ महीनों (06 जनवरी, 2025 तक) में, भारतीय रुपये में मामूली 2.9 प्रतिशत की गिरावट आई, जो कि कनाडाई डॉलर, दक्षिण कोरियाई वॉन और ब्राजीलियाई रियल जैसी मुद्राओं से बेहतर हैं, जो इसी अवधि के दौरान क्रमशः 5.6 प्रतिशत, 8.2 प्रतिशत और 17.4 प्रतिशत तक गिर गए।
• वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (REER), जो मुद्रा की वास्तविक क्रय शक्ति को दर्शाती है, अप्रैल, 2024 में 103.2 से बढ़कर दिसंबर, 2024 में 107.2 हो गई।
विदेशी ऋण की स्थिति
• भारत का बाहरी ऋण पिछले कुछ वर्षों से स्थिर रहा है, सितंबर, 2024 के अंत में बाहरी ऋण और जीडीपी का अनुपात 19.4 फीसदी रहा है।